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मैया मैं नहिं माखन खायो

ब्रजभाषा से आज की हिंदी

ब्रजभाषा के शब्दों को आज की हिंदी में बदलना सीखो।

सूरदास के पद (किताब 'मल्हार', पृष्ठ 94) की दूसरी पंक्ति में 'पाछे' शब्द आता है। आज की हिंदी में हम इसे 'पीछे' बोलते और लिखते हैं। पद में ऐसे और भी शब्द हैं जिन्हें हम आज थोड़े अलग रूप में बोलते हैं। पृष्ठ 99 पर किताब ने ऐसे शब्द दिए हैं।

ये रहे वे शब्द, पहले ब्रज का रूप, फिर आज की हिंदी का: पाछे — पीछे; परे — पड़े; छोटो — छोटा; बिधि — विधि; भोरी — भोली; कछु — कुछ; लै — लेकर; नहिं — नहीं।

अब पृष्ठ 100 देखो। वहाँ 'भोरी' शब्द पर बात है। 'भोरी' का अर्थ है 'भोली'। यहाँ 'ल' की जगह 'र' आ गया है। जब किसी शब्द में एक वर्ण की जगह दूसरा वर्ण आ जाए, तो इसे 'वर्ण-परिवर्तन' कहते हैं।

पद में एक और ऐसा शब्द है: 'परे', जिसे आज हम 'पड़े' लिखते हैं। यहाँ 'ड़' की जगह 'र' आया है। तो इस पद में 'ल' या 'ड़' कई बार 'र' बन जाते हैं — भोली से भोरी, पड़े से परे।

ब्रजभाषा के कई शब्द आज की हिंदी में बदले रूप में बोले जाते हैं (पाछे — पीछे, कछु — कुछ, नहिं — नहीं), और जब एक वर्ण की जगह दूसरा आ जाए (भोली → भोरी, पड़े → परे), तो उसे वर्ण-परिवर्तन कहते हैं।

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