मैया मैं नहिं माखन खायो
तुक
पद में तुक मिलाने वाले शब्द खोजो।
अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 94 खोलो और सूरदास का पद 'मैया मैं नहिं माखन खायो' ज़ोर से पढ़ो। हर पंक्ति के आखिरी शब्द पर ध्यान दो — क्या तुम्हें उनमें कोई मेल सुनाई देता है?
पृष्ठ 98 पर किताब दो पंक्तियों के आखिरी शब्द दिखाती है: 'पठायो' और 'आयो'। दोनों की अंतिम ध्वनि एक जैसी है — '-आयो'। पंक्तियों के अंत में ध्वनि के इस मेल को 'तुक' कहते हैं।
इस पूरे पद में हर पंक्ति का अंतिम शब्द तुक मिलाता है। पंक्तियों के आखिरी शब्द क्रम से ये हैं: खायो, पठायो, आयो, पायो, लपटायो, पतियायो, जायो, नचायो, लगायो। सबके अंत में '-आयो' की ध्वनि है! बहुत-से कवि अपनी रचना को सुंदर और असरदार बनाने के लिए तुक का उपयोग करते हैं — तुक से पद गाने में भी मीठा लगता है।
इस पद की एक और विशेषता है: इसकी अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम भी दिया है — 'सूरदास'। सूरदास के पदों में अक्सर आखिरी पंक्ति में उनका नाम आता है।
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