मैया मैं नहिं माखन खायो
पहर से समय
पहर से समय गिनने का पुराना तरीका जानो।
सूरदास के पद (किताब 'मल्हार', पृष्ठ 94) में कृष्ण कहते हैं कि वे चार पहर बंसीवट में भटके और साँझ को घर आए। 'पहर' और 'साँझ' — ये दोनों शब्द समय बताते हैं। पृष्ठ 103 पर किताब इन्हीं से समय का हिसाब लगवाती है।
पहले पहर को समझो। पहर समय मापने की एक पुरानी इकाई है। एक पहर तीन घंटे का होता है, और एक दिवस (दिन और रात मिलाकर 24 घंटे) में आठ पहर होते हैं — क्योंकि 8 पहर में 3-3 घंटे जोड़ें तो 24 घंटे होते हैं।
अब कृष्ण का हिसाब: चार पहर = 3 + 3 + 3 + 3 = 12 घंटे। यानी कृष्ण के अनुसार वे 12 घंटे गाय चराते रहे। अगर वे शाम को 6 बजे लौटे, तो 12 घंटे पीछे जाओ — वे सुबह 6 बजे घर से निकले होंगे।
'दोपहर' शब्द का अर्थ है 'दो पहर'। जब दूसरा पहर ख़त्म होता है और तीसरा शुरू होता है, तब लगभग 12 बजे होते हैं और सूरज सिर पर आ जाता है। 12 बजे तक दो पहर यानी 6 घंटे बीत चुके, तो पहला पहर लगभग सुबह 6 बजे शुरू होता है।
समय बताने वाले और भी शब्द हैं: कल, अब, साँझ, वेला (समय), अवधि, ऋतु (मौसम), पखवाड़ा (पंद्रह दिन), वर्ष (साल), दशक (दस साल)।
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