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माँ, कह एक कहानी

घायल हंस

कविता के उस मोड़ तक पहुँचिए जहाँ उपवन में एक घायल हंस दिखाई देता है।

सुंदर उपवन, पक्षी गा रहे हैं ... और अचानक कविता मुड़ जाती है: "गाते थे खग कल कल स्वर से, सहसा एक हंस ऊपर से, गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से, हुई पक्ष की हानी!"

कठिन शब्द:

शब्दअर्थ
खगपक्षी
बिद्धबिंधा हुआ, घायल
खर-शरतेज़ धार वाला तीर
पक्ष (यहाँ)पंख

यानी तेज़ तीर लगने से हंस का पंख घायल हो गया।

बेटा अब तक खुश था, पर अब दुखी हो जाता है: "हुई पक्ष की हानी? करुणा-भरी कहानी!" वह समझ गया कि कहानी अब दुख की ओर मुड़ रही है।

"चौंक उन्होंने उसे उठाया, नया जन्म-सा उसने पाया।" तात ने चौंककर हंस को उठा लिया। हंस को मानो नया जीवन मिल गया।

पर तभी: "इतने में आखेटक आया, लक्ष्य-सिद्धि का मानी।" आखेटक = शिकारी। लक्ष्य-सिद्धि का मानी = जिसे अपने सही निशाने पर घमंड था।

"माँगा उसने आहत पक्षी, तेरे तात किंतु थे रक्षी। तब उसने, जो था खगभक्षी, हठ करने की ठानी।"

  • आहत = घायल
  • रक्षी = रक्षा करने वाले (तात)
  • खगभक्षी = पक्षियों को खाने वाला (शिकारी)

शिकारी ने हंस माँगा, तात ने मना किया, तो शिकारी ज़िद पर अड़ गया।

"हुआ विवाद सदय-निर्दय में, उभय आग्रही थे स्वविषय में, गई बात तब न्यायालय में।"

  • सदय = दयालु (तात); निर्दय = दया-रहित (शिकारी)
  • उभय = दोनों
  • स्वविषय में आग्रही = अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए

जब दोनों में से कोई नहीं माना, तो बात न्यायालय (अदालत) तक पहुँची।

तीर से घायल हंस को तात ने बचाया, शिकारी ने उसे माँगा, और दोनों के अड़ जाने पर बात न्यायालय तक गई।

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