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माँ, कह एक कहानी

न्याय का प्रश्न

कविता के सबसे बड़े प्रश्न पर सोचिए कि हंस पर किसका अधिकार है।

अब कविता का सबसे बड़ा मोड़। माँ न्यायालय का फ़ैसला खुद नहीं बताती; वह बेटे से ही पूछ लेती है!

"राहुल, तू निर्णय कर इसका, न्याय पक्ष लेता है किसका? कह दे निर्भय, जय हो जिसका। सुन लूँ तेरी बानी।" यहीं पहली बार बेटे का नाम आता है: राहुल। (निर्भय = बिना डरे; बानी = वाणी, बात।)

राहुल चौंक जाता है: "माँ, मेरी क्या बानी? मैं सुन रहा कहानी।" सोचिए, कहानी हम मज़े के लिए सुनते हैं। राहुल को क्या पता था कि उसे खुद दिमाग लगाकर फ़ैसला करना पड़ेगा!

फिर राहुल उत्तर देता है, और यही कविता की सबसे प्रसिद्ध पंक्तियाँ हैं: "कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे? रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!"

अर्थ समझिए:

  • निरपराध = जिसने कोई अपराध नहीं किया (बेचारा हंस तो बस उड़ रहा था!)
  • अगर कोई निरपराध को मारे, तो दूसरा उसे क्यों न उबारे (बचाए)?
  • रक्षक पर भक्षक को वारे = न्याय मारने वाले (भक्षक) की जगह बचाने वाले (रक्षक) का साथ दे
  • न्याय दया का दानी = सच्चे न्याय में दया होती है

अपने जीवन से सोचिए: अगर सड़क पर कुछ बड़े बच्चे किसी बेकसूर बच्चे को परेशान कर रहे हों, तो क्या आप उसकी मदद नहीं करेंगे? राहुल भी यही कह रहा है।

माँ का जवाब बस एक पंक्ति है: "न्याय दया का दानी? तूने गुनी कहानी।" (गुनी = समझ ली।) यानी राहुल ने कहानी केवल सुनी नहीं, समझ भी ली। यही कविता का अंत है, और यही उसका उद्देश्य भी।

माँ निर्णय स्वयं नहीं देती, राहुल से कराती है — और राहुल कहता है कि न्याय दया का दानी है।

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