माँ, कह एक कहानी
पात्रों की पहचान
कविता के पात्रों को पहचानिए और उन्हें उनकी बातों से मिलाइए।
पृष्ठ 5 पर 'मिलकर करें मिलान' में तीन पात्र हैं: बेटा, माँ और तात (पिता)। कविता में इनके पूरे नाम नहीं आते, इसलिए इन्हें पहचानना पड़ता है।
| पात्र | कौन | कैसे पता चला |
|---|---|---|
| बेटा | राहुल, सिद्धार्थ और यशोधरा का पुत्र | अंत के पास माँ एक बार नाम से बुलाती है |
| माँ | यशोधरा, एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी | कविता में नाम नहीं; कवि-परिचय से पता चलता है |
| तात | सिद्धार्थ, एक राजकुमार | जो आगे चलकर गौतम बुद्ध कहलाए |
यह आख़िरी बात कहानी का पूरा अर्थ बदल देती है! जो युवक उपवन में घायल हंस को उठाकर उसकी रक्षा करता है, वही आगे चलकर गौतम बुद्ध बनता है। और बुद्ध का सबसे बड़ा उपदेश है: करुणा (दया) और अहिंसा।
इसलिए यह केवल एक सुंदर कहानी नहीं। यह उस व्यक्ति के बचपन की कहानी है जिसने आगे चलकर संसार को दया सिखाई, और यह कहानी उसका अपना बेटा सुन रहा है।
और इसीलिए माँ फ़ैसला खुद नहीं सुनाती। वह चाहती है कि राहुल खुद वही समझे जो उसके पिता ने समझा था: न्याय दया का दानी है।
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