मीरा के पद
समान ध्वनि और काँगड़ा चित्र
मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द खोजिए और काँगड़ा चित्रकला के बारे में जानिए।
पृष्ठ 138 पर 'आज की पहेली'। पाठ के पाँच शब्द, और एक वर्ग में अक्षर। हर शब्द की अंतिम ध्वनि से मिलता-जुलता शब्द ढूँढ़ना है।
पहला उदाहरण भरा हुआ है: 'मूरति' के लिए 'सूरति'। दोनों 'ति' पर ख़त्म होते हैं, और पद की एक ही पंक्ति में साथ आए हैं: "मोहनि मूरति साँवरि सूरति"।
बाक़ी चार के जोड़ीदार भी पद में ही मिल जाएँगे:
| शब्द | मिलती ध्वनि वाले शब्द |
|---|---|
| सावन | भावन, आवन |
| उमड़ | घुमड़ |
| नागर | वर्ग में '-आगर' पर ख़त्म होने वाला शब्द खोजिए |
| नंदलाल | विशाल, माल, रसाल, गोपाल |
इससे पता चलता है: मीरा के पदों में समान ध्वनि वाले शब्द बहुत हैं। यही उन्हें गाने योग्य बनाता है, इसीलिए ये पद भजन की तरह गाए जाते हैं, सिर्फ़ पढ़े नहीं जाते।
पृष्ठ 137 पर 'चित्र करते हैं बातें': मीरा का एक चित्र, जिसमें वे लंबे काले केश, नारंगी वस्त्र और हाथ में एकतारा लिए बैठी हैं। "यह मीरा का काँगड़ा शैली में बना चित्र है।" काँगड़ा शैली = हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा क्षेत्र की एक पहाड़ी चित्रकला शैली, जो कोमल रंगों और भक्ति के विषयों के लिए जानी जाती है। इस चित्र के आधार पर मीरा पर एक अनुच्छेद लिखिए।
और 'खोजबीन': कक्षा 6 की 'मल्हार' में आपने पढ़ा था कि सूरदास भी श्रीकृष्ण के भक्त थे। उनकी कुछ रचनाएँ ढूँढ़कर कक्षा में सुनाइए। दो कृष्ण-भक्त कवि, दो अलग कक्षाओं में!
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.