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मीरा के पद

मधुर ध्वनियाँ

पदों की मधुर ध्वनियों को पहचानिए और महसूस कीजिए।

पृष्ठ 135 पर 'मधुर ध्वनियाँ'। पंक्तियाँ: "अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल॥ क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल॥" इनमें तीन चीज़ें हैं जिनसे मधुर ध्वनि निकलती है:

  • मुरली (बाँसुरी)
  • घंटिका (छोटी घंटी)
  • नूपुर (पैरों के घुँघरू)

यानी कृष्ण का वर्णन सिर्फ़ देखने का नहीं, सुनने का भी है! इसीलिए वह इतना जीवित लगता है: आँख और कान दोनों से समझ आता है।

अब पृष्ठ 136 की पहेलियाँ: आठ वाद्ययंत्र, जिन्हें चित्रों से मिलाना है।

पहेली (संकेत)उत्तर
"हवा से बोलती है ... होठों से छू जाए"बाँसुरी (पद की वही मुरली!)
"दो साथियों का जोड़ा, हाथों से है बजता, ताल मिलाए"तबला
"फूँकों से संगीत सुनाती, सुख के सारे काम सजाती, दुख में भी ये साथ निभाती"शहनाई
"तारों में छिपा संगीत, माँ सरस्वती का गहना"वीणा
पहेली (संकेत)उत्तर
"दो हाथों से बजती है ये ... लटक गले ये करती सैर"ढोलक
"नागिन-सी लहराती है जो ... तीन, चीन, रंगीन, हीन से मिली-जुली पहचान"बीन
"सौ तारों का जादू, डंडियों से जो गाए, कश्मीर की वादियों जैसा"संतूर
"छोटा-सा यंत्र है, हाथों से बजता ... घर-मंदिर का साथी, झंकार"मंजीरा

बीन वाली पहेली की चालाकी देखिए: 'तीन, चीन, रंगीन, हीन' सब '-ईन' पर ख़त्म होते हैं। तो उत्तर भी '-ईन' वाला होगा, और साँप (नागिन) से जुड़ा: बीन! पहेली में ध्वनि भी संकेत हो सकती है।

पद में मुरली, घंटिका और नूपुर — तीनों ध्वनि की चीज़ें हैं, इसीलिए वर्णन कान से भी समझ आता है।

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