मीरा के पद
शब्दों के रूप
पद में आए शब्दों के अलग-अलग रूप पहचानिए।
पृष्ठ 132 पर 'शब्दों के रूप'। पंक्ति: "मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।" 'साँवरि' की जगह आज हम प्रायः 'साँवली' कहते हैं।
"इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं, जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे।" ये शब्द ग़लत नहीं हैं! ये 500 साल पहले की हिंदी (ब्रज भाषा) के रूप हैं, और तब से इनका रूप बदल गया है।
| पद का रूप | आज का रूप |
|---|---|
| साँवरि | साँवली |
| नैनन | नैनों में, नेत्रों में |
| सोभित | शोभित |
| भक्त वछल | भक्त वत्सल (भक्तों से स्नेह करने वाला) |
| बदरिया | बदली, बादल |
| पद का रूप | आज का रूप |
|---|---|
| मेरो मनवा | मेरा मन (दो बदलाव: मेरो→मेरा, मनवा→मन) |
| आवन | आना, आगमन |
| दिश | दिशा |
| मेहा | मेघ, वर्षा |
दो रोचक बातें:
- ब्रज भाषा में आज के 'श' की जगह प्रायः 'स' बोला-लिखा जाता था: सोभित → शोभित
- '-इया' जोड़ना (बादल → बदरिया) ब्रज और अवधी में आम था, और यह शब्द को प्यार का रंग देता है। 'बदरिया' 'बादल' से ज़्यादा कोमल लगता है न?
बड़ी सीख: भाषा बदलती रहती है। 500 साल में बहुत-से शब्दों का रूप बदल गया। फिर भी मीरा के पद आज भी समझ आते हैं और गाए जाते हैं। भाषा बदली, पर इतनी नहीं कि नाता टूट जाए।
'साँवरि' आज 'साँवली' है और 'मेरो मनवा' आज 'मेरा मन' — भाषा बदलती रहती है, पर नाता नहीं टूटता।
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