फूल और काँटा
कवि से परिचय
कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' के जीवन और रचनाओं के बारे में जानिए।
पृष्ठ 30 पर 'कवि से परिचय' एक जानी-पहचानी पंक्ति से शुरू होता है: "उठो लाल, अब आँखें खोलो। पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।" बचपन में यह प्यारी कविता आपने भी पढ़ी होगी। अपने माता-पिता से पूछिए, शायद उन्होंने भी पढ़ी हो!
इसे लिखने वाले अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' ही 'फूल और काँटा' के कवि हैं। 'हरिऔध' उनका उपनाम है: वह नाम जो कवि अपनी रचनाओं के लिए चुनता है।
कवि के बारे में:
| बात | जानकारी |
|---|---|
| जन्म | 1865, आज़मगढ़ (उत्तर प्रदेश) |
| निधन | 1947 |
| प्रसिद्ध काव्य-कृति | 'प्रियप्रवास': खड़ी बोली का पहला महाकाव्य |
| बच्चों के लिए | अनेक कविताएँ; संकलन 'चंद्र-खिलौना' और 'खेल-तमाशा' |
खड़ी बोली वह हिंदी है जो आज लिखी और बोली जाती है। इससे पहले हिंदी कविता ज़्यादातर ब्रजभाषा में लिखी जाती थी।
यह बात बड़ी है! महाकाव्य किसी भाषा की सबसे बड़ी कविता-रचना होती है। खड़ी बोली का पहला महाकाव्य लिखकर हरिऔध ने दिखाया कि आज की हिंदी में भी बड़ी कविता लिखी जा सकती है।
और ध्यान दीजिए: एक ही कवि ने महाकाव्य भी लिखा और बच्चों के लिए खेल-तमाशे की कविताएँ भी!
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