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वर्षा-बहार

आमोद और ऋतुओं की पहेलियाँ

कविता के शब्दों से कुछ रचिए और ऋतुओं की पहेलियाँ बूझिए।

पृष्ठ 93 पर 'सृजन'। पंक्ति: "बागों में खूब सुख से, आमोद छा रहा है।" आमोद या मोद = आनंद, हर्ष, खुशी, प्रसन्नता। कविता में वर्षा के आमोद के दृश्य हैं।

कविता के दृश्यों को अनुच्छेद (गद्य) में भी लिखा जा सकता है। पाठ का उदाहरण: "हवा की ठंडक थी, बारिश की रिमझिम बूँदें गिर रही थीं, मोर नाच रहे थे और मेंढक खुश होकर गा रहे थे। ये सब मिलकर वर्षा ऋतु को एक उत्सव जैसा बना रहे थे। बागों में गुलाब की खुशबू ... पक्षी और लोग सभी प्रसन्न थे। किसान अपने खेतों में काम करते हुए इस आनंद के भागीदार बन रहे थे।"

ध्यान दीजिए: बातें कविता की ही हैं, पर गद्य में: न तुक, शब्द-क्रम सीधा, वाक्य पूरे। अब आप ऐसे ही अनुच्छेद लिखिए, 'आमोद' के और दृश्यों पर: बारिश के बाद उपवन में सैर, मित्रों संग खेलना, सर्दियों का पहला हिमपात, या समुद्र किनारे शांत सवेरा।

अब पृष्ठ 94 की 'आज की पहेली': छह ऋतुओं की छह पहेलियाँ!

पहेली (संकेत)ऋतु
"सूरज ने सबको झुलसाया। आम पकें तो रस ढलके"ग्रीष्म
"पानी बरसे, बादल गरजे ... नदियाँ-नाले भरे"वर्षा
"हवा में ठंडक बढ़ती जाए, धूप सुहानी ... नई फ़सल खेतों में लाए"शरद
पहेली (संकेत)ऋतु
"फूल खिले, हर पक्षी गाए, चारों ओर हरियाली ..."वसंत
"बर्फ़ गिरे, सर्दी बढ़ जाए, ऊनी कपड़े ... धुंध की चादर"शिशिर
"पत्ता-पत्ता गिरता जाए, सूनी डाली ... पेड़ करें ख़ुद को तैयार"हेमंत (पेड़ पत्ते गिराकर आने वाली कड़ी ठंड के लिए तैयार होते हैं)
'आमोद' का अर्थ आनंद है — और छह पहेलियाँ छह ऋतुओं को उनके अपने चिह्नों से पहचनवाती हैं।

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