वर्षा-बहार
पंक्तियों का भावार्थ
कविता की पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए।
पृष्ठ 86 पर 'मिलकर करें मिलान' में कविता की छह पंक्तियाँ और उनके भावार्थ हैं। भावार्थ = पंक्ति का भाव, सरल शब्दों में।
| पंक्ति | भावार्थ |
|---|---|
| "पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं।" | वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं |
| "चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब।" | ठंडी हवा के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं |
| "तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते।" | वर्षा में तालाबों के जीव-जंतु बहुत प्रसन्न हैं |
| पंक्ति | भावार्थ |
|---|---|
| "फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते।" | वर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं |
| "खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है।" | वर्षा में खिले गुलाब जैसे फूल सुगंध और ताज़गी फैला रहे हैं |
| "चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर।" | हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन दिखाती हैं |
पहली पंक्ति का भावार्थ लगभग वही है जो पंक्ति कहती है। पर गुलाब वाले भावार्थ में 'ताज़गी' शब्द जुड़ गया, जो पंक्ति में लिखा नहीं, पर उसमें छिपा है।
सबसे रोचक है हंसों वाला भावार्थ। पंक्ति बस इतना कहती है कि हंस कतार बाँधकर चलते हैं। पर भावार्थ उसमें अनुशासन देखता है, क्योंकि क्रम से चलना अपने आप नहीं होता! यही अंतर है:
- शब्दार्थ बताता है कि क्या कहा गया
- भावार्थ बताता है कि उसका अर्थ क्या है
शब्दार्थ बताता है कि क्या कहा गया, भावार्थ बताता है उसका अर्थ क्या है — जैसे हंसों की कतार में अनुशासन।
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