वर्षा-बहार
वर्षा और बहार
कविता के शीर्षक 'वर्षा-बहार' और उसकी पहली पंक्ति पर सोचिए।
पृष्ठ 88 पर 'कविता की रचना' में कविता के शीर्षक पर ध्यान दिलाया गया है। पहली पंक्ति: "वर्षा-बहार सब के, मन को लुभा रही है।"
दो शब्द:
- वर्षा = एक ऋतु, बरसात का मौसम
- बहार = वसंत ऋतु का दूसरा नाम
अरे, ये तो दो अलग ऋतुएँ हैं! वसंत मार्च-अप्रैल में आता है और वर्षा जुलाई-अगस्त में। फिर दोनों को साथ क्यों रखा?
पाठ का उत्तर: "वर्षा और बहार को साथ दिया गया है, जिससे वर्षा ऋतु की सुंदरता स्पष्ट हो सके।" 'बहार' शब्द अपने साथ वसंत की सुंदरता, हरियाली और खिलावट लाता है। 'वर्षा-बहार' कहकर कवि कहता है: वर्षा भी वसंत जितनी सुंदर है! दो शब्द जोड़कर पूरी बात कह दी।
एक और बात: कविता की कुछ पंक्तियाँ सीधे वाक्य हैं, कुछ नहीं।
- "पानी बरस रहा है": बिलकुल सीधा वाक्य
- "फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते": शब्द-क्रम उलटा है! सीधा क्रम होता: "देखो, पपीहे घूम रहे हैं और गर्मी की तपन भूल रहे हैं।"
कवि लय के लिए शब्दों का क्रम बदल देता है।
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