बिरजू महाराज से साक्षात्कार
उपसर्ग और प्रत्यय
पाठ के शब्दों से उपसर्ग और प्रत्यय पहचानना सीखिए।
पृष्ठ 106 पर 'शब्दों की बात' में पाठ के कुछ शब्द हैं: आजीविका, सीमित, प्रशिक्षण, सुंदरता, आधुनिक, पारंपरिक, भारतीय, सामूहिक, शास्त्रीय।
इनमें मूल शब्द के आगे या पीछे कोई शब्दांश (शब्द का टुकड़ा) जुड़ा है, और इससे अर्थ बदल गया है।
उपसर्ग = शब्द के आगे जुड़ने वाला शब्दांश।
| शब्द | बनावट | उपसर्ग |
|---|---|---|
| अदृश्य | अ + दृश्य | अ (दृश्य = जो दिखे; अदृश्य = जो न दिखे) |
| आवरण | आ + वरण | आ |
| प्रशिक्षण | प्र + शिक्षण | प्र |
प्रत्यय = शब्द के पीछे जुड़ने वाला शब्दांश, जो अर्थ में नयापन या बदलाव लाता है।
| शब्द | बनावट | प्रत्यय |
|---|---|---|
| सीमित | सीमा + इत | इत |
| सुंदरता | सुंदर + ता | ता |
| भारतीय | भारत + ईय | ईय |
| सामूहिक | समूह + इक | इक |
ध्यान दीजिए: प्रत्यय लगने पर मूल शब्द कभी-कभी थोड़ा बदल जाता है: समूह + इक में 'समूह' बना 'सामूह', और सीमा + इत में 'सीमा' बनी 'सीम'। यह स्वाभाविक है।
अब आप भी बनाइए:
- आ + गमन = आगमन (उपसर्ग)
- राष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय
- श्रम + इक = श्रमिक
- मर्म + इक = मार्मिक
- संस्कृति + इक = सांस्कृतिक
- सामान्य + ता = सामान्यता
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