LearnWave
Learn it. Master it.

बिरजू महाराज से साक्षात्कार

साक्षात्कार की रचना

जानिए कि एक साक्षात्कार कैसे रचा जाता है।

पृष्ठ 107 पर 'शब्दों का प्रभाव'। वाक्य: "कुछ कथिक डर गए किंतु उन कथिकों की कला में इतना दम था कि डाकू सब कुछ भूलकर उन कथिकों के कथक में मग्न हो गए।"

अब 'इतना' हटाकर पढ़िए: "उन कथिकों की कला में दम था कि ..." वाक्य फीका हो गया! 'इतना' बताता है कि दम कितना था: इतना कि डाकू भी नाचने लगे। एक छोटा शब्द पूरे वाक्य का प्रभाव बदल देता है।

अब पृष्ठ 108 पर 'साक्षात्कार की रचना':

"सामान्यतः इसे बातचीत या भेंटवार्ता मान लिया जाता है, लेकिन यह इस बात में भिन्न है कि इसका एक निश्चित उद्देश्य और ढाँचा होता है।" साधारण बातचीत कहीं भी चली जाती है; साक्षात्कार के प्रश्न पहले से सोचकर बनाए जाते हैं।

"यह साक्षात्कार किसी नौकरी या दाख़िले के लिए होने वाले साक्षात्कार से बिलकुल भिन्न है।" वहाँ प्रश्न पूछने वाला परखता और निर्णय करता है; यहाँ वह केवल जानना चाहता है।

यह व्यक्तिपरक साक्षात्कार है (व्यक्तिपरक = एक व्यक्ति पर केंद्रित)। उद्देश्य: व्यक्ति का निजी जीवन, कामकाज, उपलब्धियाँ, रुचि-अरुचि और विचार पाठकों के सामने लाना।

किसी भी साक्षात्कार के लिए चाहिए:

  • पर्याप्त तैयारी
  • संवेदनशीलता (सामने वाले की भावना का ध्यान)
  • धैर्य

सफलता इस पर निर्भर है कि व्यक्ति के बारे में कितना शोध किया गया और प्रश्न कैसे बनाए गए।

इसी पाठ में देखिए: श्रेया का पहला प्रश्न "सुना है कि आपका बचपन संघर्षों से भरा हुआ था" से शुरू होता है। यानी उसने पहले से जानकारी ली थी। यही तैयारी है!

साक्षात्कार बातचीत नहीं है — उसका निश्चित उद्देश्य और ढाँचा होता है, और उसकी सफलता तैयारी पर निर्भर है।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.