बिरजू महाराज से साक्षात्कार
नृत्य की छटाएँ
भारत के शास्त्रीय नृत्यों की छटाओं के बारे में जानिए।
पृष्ठ 110 पर 'झरोखे से' में 'नृत्य की छटाएँ': बिरजू महाराज ने जिन शास्त्रीय नृत्यों के नाम गिनाए थे, उनका परिचय।
| नृत्य | ख़ास बातें |
|---|---|
| भरतनाट्यम | नृत्य का सबसे प्राचीन रूप; नाम 'भरतमुनि' और 'नाट्यम्' से; तमिलनाडु के मंदिरों की एकल प्रस्तुति 'सादिर' से जुड़ा |
| कथकली | केरल के मंदिरों की परंपराओं रामानाट्टम और कृष्णानाट्टम से निकला; संगीत, नृत्य और नाटक का मेल; पुरुष मंडली करती है |
| कथक | ब्रजभूमि की रासलीला से निकला; नाम 'कथिक' (कथावाचक) से; घरानों का विकास; मुख्य आकर्षण जुगलबंदी |
जुगलबंदी में तबलावादक और नर्तक के बीच एक प्रतिस्पर्धा का खेल होता है: दोनों एक-दूसरे को चुनौती देते हैं!
| नृत्य | ख़ास बातें |
|---|---|
| कुचिपुड़ी | आंध्र प्रदेश; प्रार्थना से शुरू, फिर नृत्य-अभिनय; कर्नाटक संगीत की संगत; तरंगम के बाद समापन |
| मणिपुरी | मणिपुर की घाटियाँ; त्योहार 'लाई हरोबा' में; प्रायः स्त्रियाँ करती हैं; चेहरे से ज़्यादा हाथ के हाव-भाव और पैरों की गति |
| ओडिसी | नाम 'सोदा नृत्य' (नाट्यशास्त्र) से; मुख्य आकर्षण त्रिभंग मुद्रा (शरीर के तीन मोड़) |
| मोहिनीअट्टम | केरल; घुमावदार, कोमल अभिनय; चेहरे और हस्त-मुद्राओं का सबसे ज़्यादा महत्व; पोशाक 'मुंडू' |
एक रोचक जोड़ी, दोनों केरल से: "पारंपरिक रूप से मोहिनीअट्टम केवल स्त्रियों द्वारा किया जाता है, जबकि कथकली केवल पुरुषों द्वारा।"
अब लोक और शास्त्रीय नृत्य वाली बात याद कीजिए: कथक रासलीला और कथिकों से, भरतनाट्यम सादिर से, कथकली लोक नाट्य से। यानी बिरजू महाराज ठीक कहते थे: शास्त्रीय नृत्य लोक परंपरा से ही निकले हैं।
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