LearnWave
Learn it. Master it.

बिरजू महाराज से साक्षात्कार

लय हर काम में

जानिए कि बिरजू महाराज के अनुसार लय हर काम में कैसे होती है।

श्रेया का प्रश्न: "क्या नृत्य सीखने के लिए संगीत जानना ज़रूरी होता है?"

"गाना, बजाना और नाचना: ये तीनों संगीत का हिस्सा हैं। संगीत में लय होती है। उसका ज्ञान आवश्यक है।"

"नृत्य में शरीर, ध्यान और तपस्या का साधन होता है। नृत्य करना एक तरह से अदृश्य शक्ति को निमंत्रण देना है: कृष्ण, मेरे अंदर समाओ और नाचो।" जब हम पूरे मन से कुछ करते हैं, तो उसमें डूब जाते हैं।

अब पाठ की सबसे सुंदर बात: "नृत्य ही नहीं, हमारी हर गतिविधि में लय होती है।" उदाहरण बिलकुल साधारण है:

"घसियारा घास को हाथ से पकड़कर उस पर हँसिया मारता है और फिर घास हटाता है। मारने और हटाने की इस लय में ज़रा भी गड़बड़ी हुई नहीं कि उसका हाथ गया।"

  • घसियारा = घास काटने वाला
  • हँसिया = घास काटने का मुड़ा हुआ औज़ार

घर में भी देखिए: माँ रोटी बनाती हैं, तो बेलना, तवे पर डालना, पलटना, आँच पर फुलाना, सब एक लय में चलता है। लय टूटी, तो रोटी जलेगी या हाथ जलेगा! यहाँ लय सुंदरता की नहीं, सुरक्षा की बात है। लय सिर्फ़ कला की चीज़ नहीं, जीवन की चीज़ है।

"लय हर काम में, नृत्य में, जीवन में संतुलन बनाए रखती है। लय एक तरह का आवरण है, जो नृत्य को सुंदरता प्रदान करती है।"

  • आवरण = ढकने वाली परत
  • लहरा = संगीत की एक धुन, जो ताल के साथ बार-बार बजती है

अगर नर्तक को सुर-ताल की समझ है, तो वह जान लेगा कि "यह लहरा ठीक नहीं है"; ग़लत लहरे पर नृत्य अंगों में प्रवेश नहीं करेगा।

लय केवल नृत्य में नहीं — घसियारे के हाथ और हँसिया के बीच भी लय है, और वहाँ वह जीवन बचाती है।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.