चिड़िया
कवि से परिचय
कवि आरसी प्रसाद सिंह के जीवन और उनकी रचनाओं के बारे में जानिए।
पृष्ठ 118 पर 'कवि से परिचय'।
| बात | जानकारी |
|---|---|
| कवि | आरसी प्रसाद सिंह |
| जीवनकाल | 1911 – 1996 |
| विषय | प्रकृति और जीवन-संघर्ष |
| चर्चित कविता संग्रह | 'कलापी' और 'आरसी' |
कविता संग्रह = एक कवि की बहुत-सी कविताएँ, एक किताब में इकट्ठी। मज़ेदार बात: 'आरसी' उनके अपने नाम का ही हिस्सा है!
दो विषय, और 'चिड़िया' में दोनों हैं:
- प्रकृति: पीपल, पक्षी, आकाश
- जीवन-संघर्ष: मनुष्य का बंधन और लालच
"वे अपनी रचनाओं में प्रेम, करुणा, त्याग-बलिदान, मुक्ति और मिल-जुलकर एक सुंदर संसार रचने की कल्पना करते रहे हैं।" अब इन्हें 'चिड़िया' में खोजिए:
| भाव | 'चिड़िया' की पंक्ति |
|---|---|
| प्रेम | 'प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है' |
| करुणा और त्याग | 'बच जाता जो, औरों के हित, उसे छोड़ वे देते हैं' |
| मुक्ति | 'मुक्ति-मंत्र बतलाती है' |
| मिल-जुलकर सुंदर संसार | 'सब मिल-जुलकर रहते हैं वे' |
सब मिल गए! परिचय ख़ुद भी कविता की वही पंक्ति चुनता है जो पूरे पाठ का केंद्र है: "चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है! वह जग के बंदी मानव को मुक्ति-मंत्र बतलाती है!"
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