चिड़िया
संदर्भ और भाव
कविता के संदर्भों को उनके सही भाव से मिलाइए।
पृष्ठ 119 पर 'मिलकर करें मिलान' में कविता के पाँच संदर्भ हैं और उनके भाव। (संदर्भ = कविता का पद या प्रसंग; भाव = उसका आशय।)
| संदर्भ | भाव |
|---|---|
| चिड़िया की बोली | प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश |
| सोने की कड़ियाँ | बंधन और लालच |
| निर्भय विचरण | स्वतंत्रता और निर्बाध (बिना रुकावट) जीवन |
| मुक्ति-मंत्र | बंधन से मुक्ति |
| दिनभर काम | श्रम और संतोष |
अब पाँचों को क्रम से पढ़िए; पूरी कविता का तर्क बन जाता है:
- आरंभ: चिड़िया की बोली प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश देती है
- समस्या: मनुष्य सोने की कड़ियों में, यानी लालच में, बँधा है
- उदाहरण: पक्षी निर्भय विचरण करते हैं
- समाधान: चिड़िया मुक्ति-मंत्र बताती है
- रास्ता: दिनभर काम, यानी श्रम और संतोष
मिलान करते समय दो संदर्भ आपस में उलझ सकते हैं: 'निर्भय विचरण' और 'मुक्ति-मंत्र'। याद रखिए: पक्षी पहले से स्वतंत्र हैं (विचरण), जबकि मनुष्य को छूटना है (मुक्ति)।
सोने की कड़ियाँ बंधन और लालच हैं, निर्भय विचरण स्वतंत्रता, और दिनभर का काम श्रम तथा संतोष।
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