तरुण के स्वप्न
वह स्वप्न क्या है
भाषण का अगला भाग पढ़िए और जानिए कि नेताजी किस स्वप्न की बात करते हैं।
एक प्रश्न: "वह स्वप्न या आदर्श क्या है?" फिर उसका उत्तर विस्तार से आता है।
उत्तर का ढाँचा: "हम चाहते हैं, एक नया सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र।" सर्वांगीण = सब अंगों में व्याप्त (हर हिस्से में फैला हुआ)। यानी आज़ादी किसी एक क्षेत्र में नहीं, पूरे समाज में।
क्रम पर ध्यान दीजिए: पहले समाज, फिर उस पर राष्ट्र। जैसे पहले नींव, फिर भवन।
उस समाज में क्या हो:
- व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, और "समाज के दबाव से वह मरे नहीं";
- जातिभेद का स्थान न हो;
- नारी मुक्त होकर पुरुषों की तरह समान अधिकार पाए, और समाज तथा राष्ट्र की सेवा में भी समान हिस्सा ले;
- अर्थ की विषमता न हो, यानी धन की असमानता (अमीर-गरीब की बड़ी खाई) न हो;
- हर व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर मिले।
आख़िर में मेहनत की बात: "जिस समाज में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी और आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा।" अकर्मण्य = कर्म के अयोग्य, आलसी (जो काम न करे)।
यह वाक्य अधिकारों की सूची के बाद आता है: पहले सबको समान अवसर, फिर सबसे मेहनत की उम्मीद।
बाहरी प्रभाव से मुक्त: ऐसा राष्ट्र "किसी भी विजातीय प्रभाव से हर प्रकार से मुक्त रहेगा"। विजातीय = दूसरी जाति या वर्ग का, यानी बाहर का।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.