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दो गौरैया

अनुमान, कल्पना और संवाद

अनुमान, कल्पना और संवाद के ज़रिए कहानी के भीतर झाँकिए।

अनुमान, कल्पना और संवाद. इन प्रश्नों का कोई एक ठीक उत्तर नहीं। ये कहानी के भीतर झाँकने के लिए हैं।

1. गौरैयों के व्यवहार में बदलाव कब आया? पुस्तक का संकेत: खोजिए कि उन्होंने गाना कब बंद किया।

  • पहले: 'मज़े से बैठी गाना गा रही थीं', फिर 'मल्हार गा रही थीं'।
  • बाद में: 'दोनों कुछ-कुछ दुबला गई थीं, कुछ-कुछ काली पड़ गई थीं। अब वे चहक भी नहीं रही थीं।'

क्यों? वे अंडों पर बैठी थीं और बार-बार निकाली जा रही थीं। संघर्ष ने उनसे उनका गीत छीन लिया, और कहानी यह बात सीधे कहे बिना बता देती है।

गौरैयाँ अंदर कैसे आईं? दरवाज़ों के नीचे की खाली जगह से, और टूटे शीशे वाले रोशनदान से।

2. 'मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ' से पिताजी के कौन-से गुण दिखते हैं? दृढ़ता (पक्का इरादा) भी और ज़िद भी। दोनों एक ही स्वभाव के दो रूप हैं।

3. कहानी कौन सुना रहा है? घर का बेटा। यह 'मैं', 'मैंने', 'हम' जैसे शब्दों से पता चलता है: "मैंने भागकर दोनों दरवाज़े बंद कर दिए।"

4. कल्पना कीजिए: अगर घर में चिड़िया की जगह चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली या मक्खी घुस आए, तो घरवाले कैसा व्यवहार करते? हमारा व्यवहार प्राणी के अनुसार बदल जाता है: तितली पर कोई लाठी नहीं उठाता, मच्छर पर कोई दया नहीं करता।

5. सराय और घर में अंतर? सराय में लोग ठहरते हैं; घर में लोग रहते हैं, वहाँ परिवार होता है। पिताजी ने अपने घर को सराय कहा था; अंत में वह सचमुच घर बन गया, क्योंकि वहाँ एक परिवार बस गया।

संघर्ष ने गौरैयों से उनका गीत छीन लिया, और कहानी यह बात सीधे कहे बिना बता देती है।

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