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दो गौरैया

भाषा की बात

कहानी के वाक्यों से क्रिया विशेषण और भाषा की दूसरी बातें सीखिए।

भाषा की बात. तीन काम हैं।

1. क्रिया विशेषण. "माँ खिलखिलाकर हँस दीं।" यहाँ 'हँसना' क्रिया है, और 'खिलखिलाकर' बताता है कि वे कैसे हँसीं।

जो शब्द बताएँ कि कोई काम कैसे किया गया, वे क्रिया विशेषण कहलाते हैं। कहानी में और भी हैं: पिताजी ने 'झिड़ककर' कहा; माँ ने 'गंभीरता से' कहा; उन्होंने 'गुस्से में' कहा।

तीनों में क्रिया 'कहा' है, पर कहने का ढंग अलग है। इसी से पात्रों का स्वभाव दिखता है।

और क्रिया विशेषण: धीरे से, ज़ोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शरमाकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए।

2. घर के प्राणी. लेखक ने प्राणियों का वर्णन मनुष्यों की तरह किया है:

  • बिल्ली 'फिर आऊँगी' कहकर चली जाती है;
  • चमगादड़ कसरत करते हैं;
  • कबूतर संगीत सुनाते हैं;
  • चींटियाँ छावनी डालती हैं;
  • गौरैयाँ मकान का निरीक्षण करती हैं और मल्हार गाती हैं।

3. मात्रा का हेर-फेर. "माँ और पिताजी दोनों सोफ़े पर बैठे उनकी ओर देखे जा रहे थे।" एक ही मात्रा का अंतर, अर्थ बिलकुल अलग:

  • और = जोड़ने वाला शब्द;
  • ओर = दिशा, तरफ़।

ऐसे और जोड़े: उड़ा/उड़, नाच/नाचा/नचा, हार/हरा/हारा, पिता/पीता, चूक/चुक, नीचा/नीचे, सहसा/साहस। एक मात्रा की गलती अर्थ बदल देती है, इसलिए लिखते समय मात्राओं पर ध्यान दीजिए।

'और' तथा 'ओर': एक ही मात्रा का अंतर, और अर्थ बिलकुल अलग।

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