हरिद्वार
'है' और 'हैं' का उपयोग
जानिए कि वाक्यों में 'है' और 'हैं' का सही उपयोग कैसे होता है।
'है' या 'हैं'? वाक्य देखिए: "यहाँ केवल गंगा जी ही देवता हैं, दूसरा देवता नहीं।" यहाँ 'हैं' क्यों?
नियम है: एकवचन संज्ञा के साथ 'है', बहुवचन के साथ 'हैं'। और गंगा तो एक ही नदी है, यानी एकवचन।
फिर भी 'हैं' लिखा गया, क्योंकि यह आदर है। आदर दिखाने के लिए जब एकवचन संज्ञा को बहुवचन की तरह बोलते हैं, उसे 'आदरार्थ बहुवचन' कहते हैं।
हिंदी में यह आम है:
- 'मेरे पिता जी सो रहे हैं';
- 'भारत के प्रधानमंत्री भाषण दे रहे हैं';
- 'गुरु जी आए हैं'।
इनमें से कोई भी वाक्य एक से ज़्यादा लोगों की बात नहीं कर रहा।
फ़र्क़ पहचानिए: "यों तो वैरागियों ने मठ मंदिर कई बना लिए हैं।" यहाँ 'हैं' सामान्य बहुवचन के कारण है (कई मठ-मंदिर), आदर के कारण नहीं।
काल (tense). काल के तीन भेद हैं: भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य काल।
पत्र से उदाहरण:
- "यहाँ हरि की पैड़ी नामक एक पक्का घाट है और यहीं स्नान भी होता है" → वर्तमान काल;
- "मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था" → भूतकाल;
- "निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा" → भविष्य की ओर संकेत।
ध्यान दीजिए: लेखक जगह का वर्णन वर्तमान काल में करते हैं, और अपने अनुभव का भूतकाल में। क्योंकि जगह अब भी वैसी ही है, पर उनकी यात्रा बीत चुकी है।
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