हरिद्वार
पत्र की रचना
जानिए कि एक पत्र किन-किन अंगों से मिलकर बनता है।
पत्र के अंग. यह पाठ एक पत्र है, तो जानना उपयोगी है कि पत्र किन अंगों से बनता है। हर अंग का उदाहरण इसी पत्र में है।
1. अभिवादन या संबोधन: पत्र के शुरू में, जिसमें पाने वाले को आदर से पुकारा जाता है: "श्रीमान कविवचन सुधा संपादक महामहिम मित्रवरेषु!"
2. व्यक्तिपरकता: पत्र में लेखक के विचार, अनुभव और भावनाएँ प्रमुख होते हैं: "ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया…"
3. व्यक्तिगत अनुभवों का वर्णन: लेखक अपना असली अनुभव बताता है: "मुझे हरिद्वार का समाचार लिखने में बड़ा आनंद होता है…", और गंगा तट पर भोजन का पूरा प्रसंग।
4. संवादात्मकता: पत्र बातचीत जैसा होता है। लेखक बीच-बीच में 'संपादक महाशय' कहकर पुकारते हैं, मानो सामने बैठे हों।
5. मुख्य विषय-वस्तु: हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिकता, साधु-संन्यासियों का जीवन, नदी, पर्वत, जल और गंगा-स्नान का विस्तार से वर्णन।
6. स्वाभाविक शैली: भाषा बनावटी नहीं, भावनाओं के अनुसार। 'अहा!' जैसे उद्गार इसका प्रमाण हैं।
7. उपसंहार और निवेदन: "निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।" और हस्ताक्षर: "आपका मित्र / यात्री / भारतेंदु हरिश्चंद्र।"
ध्यान दीजिए: उन्होंने खुद को 'यात्री' लिखा। यह भी एक परिचय है। (और एक विशेषता को एक से अधिक वाक्यों से भी जोड़ा जा सकता है।)
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