हरिद्वार
गंगा और हरि की पैड़ी
पत्र के साथ गंगा की धारा और हरि की पैड़ी तक चलिए।
गंगा की धारा. "त्रिभुवन पावनी श्री गंगा जी की पवित्र धारा बहती है जो राजा भगीरथ के उज्ज्वल कीर्ति की लता-सी दिखाई देती है।"
यह तुलना खास है। नदी की धारा की तुलना राजा भगीरथ के यश से की गई है, क्योंकि कथा के अनुसार भगीरथ ही घोर तपस्या करके गंगा को धरती पर लाए थे। इसीलिए गंगा का एक नाम 'भागीरथी' है।
जल: "अत्यंत शीतल है और मिष्ट (मीठा) भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है।" जैसे ठंडा, मीठा आम का पना। जल का रंग साफ़ और सफ़ेद है।
नदी का नाम सच. "यहाँ श्री गंगा जी अपना नाम नदी सत्य करती हैं अर्थात् जल के वेग का शब्द बहुत होता है।" यानी यहाँ पानी तेज़ी से बहता है और उसकी आवाज़ बहुत होती है; नदी सचमुच 'नदी' (नाद करने वाली) लगती है।
दो धाराएँ. गंगा यहाँ दो धाराओं में बँटी है: एक 'नील धारा', दूसरी गंगा जी के अपने नाम से। दोनों के बीच एक नीचा पर्वत है। नील धारा के किनारे एक छोटा, चुटीला (नुकीली चोटी वाला) पर्वत है, जिसकी चोटी पर चण्डिका देवी की मूर्ति है।
हरि की पैड़ी. यह एक पक्का घाट है, और वहीं स्नान होता है। गंगा का पाट (चौड़ाई) छोटा है, पर वेग (तेज़ी) बड़ा है। किनारे पर राजाओं की बनवाई धर्मशालाएँ हैं, और दुकानें भी, जो रात को बंद रहती हैं।
लेखक का आश्चर्य: "यहाँ केवल गंगा जी ही देवता हैं, दूसरा देवता नहीं।" यानी यह किसी मंदिर या मूर्ति का नहीं, स्वयं नदी का तीर्थ है। (वैरागियों ने मठ-मंदिर कई बना लिए हैं, फिर भी।)
लोग: पंडे और दुकानदार कनखल और ज्वालापुर से आते हैं। "पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।"
पाँच मुख्य तीर्थ: हरिद्वार, कुशावर्त्त, नीलधारा, विल्वपर्वत और कनखल। कनखल में, कथा के अनुसार, दक्ष ने यज्ञ किया था, और वहीं सती ने शिव का अपमान न सहकर अपना शरीर भस्म कर दिया था।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.