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हरिद्वार

शब्दों के संदर्भ

पत्र में आए नामों के पीछे छिपी कथाएँ और जानकारियाँ जानिए।

नामों के पीछे की बातें. यह पत्र नामों से भरा है, और हर नाम के पीछे एक कथा या जानकारी है।

हरिद्वार: उत्तराखंड का एक प्रसिद्ध तीर्थ। सबसे ज़रूरी भौगोलिक बात: यहीं गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है। यानी यह पर्वत और मैदान का द्वार है। नाम भी यही कहता है: 'हरि' का 'द्वार'।

गंगा: भारत की प्रमुख नदी, जो हिमालय से निकलकर लगभग 1560 मील पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके कई नाम हैं: भागीरथी, त्रिपथगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, सुरनदी।

भगीरथ: अयोध्या के प्रसिद्ध सूर्यवंशी राजा, जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने घोर तपस्या करके गंगा को धरती पर उतारा। इसीलिए गंगा का नाम 'भागीरथी' है।

अब यह पंक्ति फिर पढ़िए: गंगा 'राजा भगीरथ के उज्ज्वल कीर्ति की लता-सी दिखाई देती है'। यह तुलना तभी पूरी समझ आती है जब यह कथा पता हो।

चण्डिका: मान्यताओं के अनुसार दुर्गा का एक रूप। पत्र में नील धारा के किनारे के छोटे पर्वत पर उनकी मूर्ति है।

भागवत: अठारह पुराणों में सबसे प्रसिद्ध, जिसमें ज़्यादातर श्री कृष्ण की कथाएँ हैं। लेखक ने दिन में इसका पाठ किया था।

दालचीनी: एक पेड़, जो दक्षिण भारत में बहुत मिलता है। इसकी सुगंधित छाल दवा और मसाले के काम आती है। लेखक ने हरिद्वार की कुशा की सुगंध की तुलना इसी से की है।

'हरि' का 'द्वार': जहाँ गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है।

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