हरिद्वार
मिलकर करें चयन
पत्र के वाक्यों से सही निष्कर्ष चुनना सीखिए।
सही या भ्रामक? हर वाक्य के सामने दो निष्कर्ष हैं: एक सही, एक भ्रामक (भटकाने वाला)। भ्रामक निष्कर्ष जान-बूझकर ऐसे बनाए गए हैं कि पहली नज़र में ठीक लगें।
1. लताएँ. भ्रामक निष्कर्ष: 'सज्जनों की शुभ इच्छाएँ लताओं के समान फैल जाती हैं।' यह तुलना को उलट देता है। लेखक लताओं का वर्णन कर रहे हैं और सज्जनों से तुलना कर रहे हैं, उलटा नहीं।
2. पेड़. भ्रामक निष्कर्ष: पेड़ हर मौसम सहने के लिए 'विवश' हैं। पर लेखक ने 'तपस्या' शब्द लिखा है, और तपस्या अपनी इच्छा से की जाती है, मजबूरी से नहीं।
3. पक्षी. भ्रामक निष्कर्ष: पक्षी 'नगर से डरकर इस जगह आ गए हैं'। पर पाठ कहता है कि वे 'निडर होकर' कल्लोल करते हैं। सही निष्कर्ष: यहाँ पक्षी सुरक्षित और निडर हैं।
4. जल. भ्रामक निष्कर्ष: गंगाजल से 'शक्कर और बरफ बनाई जा सकती है'। यह तुलना को शाब्दिक बना देता है। लेखक तो केवल स्वाद का अनुभव बता रहे हैं।
5. भोजन. भ्रामक निष्कर्ष: गंगा का पानी 'बहुत गरम था और पकाने में मदद करता था'। यह पूरे पाठ के उलट है: जल तो 'अत्यंत शीतल' बताया गया है।
6. 'स्थानदान दीजिएगा'. सही अर्थ: पत्र को पत्रिका में स्थान देना, यानी छापना। भ्रामक: 'कहीं स्थान दिया जाए, सँजोया जाए'।
सीख: भ्रामक निष्कर्ष अक्सर दो तरह से बनते हैं: तुलना को उलटकर, या तुलना को शाब्दिक बनाकर।
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