एक टोकरी भर मिट्टी
लेखक से परिचय
लेखक माधवराव सप्रे के जीवन और काम के बारे में जानिए।
लेखक. इस कहानी के लेखक माधवराव सप्रे हैं। उनका जीवनकाल 1871 से 1926 तक रहा।
हिंदी की शुरुआती कहानी. परिचय की पहली पंक्ति: "हिंदी की प्रारंभिक कहानियों में 'एक टोकरी भर मिट्टी' का भी उल्लेख आता है।" यानी यह हिंदी की सबसे पहली कहानियों में से एक है। उस समय हिंदी में कहानी लिखने का चलन नया था।
मराठी से हिंदी. उनकी मातृभाषा मराठी थी, और जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ। तो वे हिंदी में कैसे आए?
"ऐसा माना जाता है कि ये लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से हिंदी में आए थे।" उन्होंने तिलक के प्रसिद्ध ग्रंथ 'गीता-रहस्य' का मराठी से हिंदी में अनुवाद भी किया।
प्रमुख कृतियाँ: 'स्वदेशी आंदोलन' और 'बायकॉट'। दोनों नाम बताते हैं कि उनका लेखन स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा था।
कहानी की कुंजी. परिचय की आख़िरी पंक्ति: "'एक टोकरी भर मिट्टी' जैसी कहानियाँ केवल घटनाएँ नहीं सुनातीं, बल्कि मिट्टी से उठते हुए उन प्रश्नों को उठाती हैं जो हमारे सामाजिक ताने-बाने में गाँठ बनकर अटके हैं।"
'गाँठ बनकर अटके' = ऐसे प्रश्न जो समाज में उलझे पड़े हैं और सुलझते नहीं: गरीबी, ताकत का गलत इस्तेमाल, और यह कि कानून और न्याय हमेशा एक नहीं होते।
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