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मत बाँधो

कवयित्री से परिचय

कवयित्री महादेवी वर्मा के जीवन और उनकी रचनाओं के बारे में जानिए।

कवयित्री. इस कविता की रचयिता महादेवी वर्मा हैं। उनका जीवनकाल 1907 से 1987 तक रहा, और जन्म फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ।

"उन्होंने छोटी उम्र से ही कविता लिखना शुरू कर दिया था।" और सपनों को न बाँधने वाली यह कविता ऐसी ही व्यक्ति की है।

बच्चों के लिए उन्होंने बहुत लिखा: 'बारहमासा', 'आज खरीदेंगे हम ज्वाला', और 'अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी'। आख़िरी शीर्षक इस कविता के साथ रखिए: दोनों में पक्षी है, और उसके रहने-उड़ने का प्रश्न है।

गद्य (कहानी, संस्मरण) भी लिखा: 'मेरा परिवार', 'अतीत के चलचित्र', 'स्मृति की रेखाएँ' और 'पथ के साथी'।

"उनके द्वारा लिखे गद्य के चरित्र पाठकों को याद रह जाने वाले होते हैं।" इसका उदाहरण पाठ के अंत में है: 'गिल्लू', एक गिलहरी की कहानी।

कविता-संग्रह (कई कविताओं की एक किताब): 'नीहार', 'रश्मि', 'नीरजा', 'सांध्य गीत' और 'दीपशिखा'।

उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

एक कम जानी बात: "बहुमुखी प्रतिभा संपन्न महादेवी वर्मा एक चित्रकार भी थीं।" शायद इसीलिए उनकी कविता में इतने चित्र हैं: सौरभ, बीज, धुआँ, बादलों के रंग, किरणों की चमक।

वे चित्रकार भी थीं: शायद इसीलिए उनकी कविता में इतने चित्र हैं।

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