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मत बाँधो

मेरी समझ से

कविता के बारे में अपनी समझ परखिए।

मेरी समझ से. पाँच प्रश्न हैं; कुछ के एक से अधिक उत्तर हो सकते हैं।

1. कविता का मुख्य भाव? विकल्प: सपने केवल कल्पनाएँ हैं; सपनों को भूल जाना चाहिए; सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए; सपने देखना अच्छी बात है।

उत्तर: सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए। कविता सपनों की आज़ादी की बात करती है।

'सपने देखना अच्छी बात है' भी ठीक लगता है, पर कविता इससे आगे की बात करती है। वह यह नहीं कहती कि सपने देखो; वह कहती है कि सपनों को मत रोको।

पहले दो विकल्प तो कविता के उलटे हैं: कविता सपनों को केवल कल्पना नहीं मानती; वे 'उड़कर आँखों में' आते हैं और धरती को स्वर्ग बनाना सिखाते हैं।

3. 'पंख' से क्या भाव? दो उत्तर ठीक हैं:

  • 'सपने पंखों की तरह उड़ान भरवाते हैं';
  • 'सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं'।

दोनों में उड़ान का भाव है, जो 'पंख' से सीधे जुड़ता है।

5. बीज धूल में गिर जाए तो? यहाँ भी दो उत्तर ठीक हैं:

  • 'उसकी उड़ान रुक सकती है' (कविता कहती है: 'वह नभ में कब उड़ पाता है?');
  • 'वह बढ़कर पौधा बन सकता है'।

दूसरा उत्तर कविता से आगे जाता है: बीज का धूल में गिरना अंत नहीं; वहीं से पौधा जन्म लेता है। यानी नीचे आना भी नई चीज़ बनने की शुरुआत हो सकता है; यही 'अवरोहण' का महत्व है।

निषेध (मना करने वाली बातें): कविता में 'न काटो', 'मत बाँधो', 'मत रोको' बार-बार आते हैं। कविता सपना देखने वाले से नहीं, सपनों को रोकने वालों से बात कर रही है।

बीज का धूल में गिरना अंत नहीं है: वहीं से पौधा जन्म लेता है।

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