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मत बाँधो

मिलकर करें मिलान

कविता की पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए।

मिलान. कविता की पाँच पंक्तियाँ और उनके पाँच भाव हैं।

1. 'इन सपनों के पंख न काटो।' → भाव पक्षी की उपमा से खुलता है: किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता; वैसे ही सपनों को रोकने से कल्पना और संभावनाएँ खत्म हो जाती हैं।

'पंख काटना' बहुत कठोर चित्र है। पिंजरे में बंद पक्षी कभी आज़ाद होकर उड़ सकता है, पर पंख कट जाएँ तो वह फिर कभी नहीं उड़ सकता।

2. 'सपनों में दोनों ही गति हैं।' → सपना विचार की तरह जन्म लेता है, और फिर व्यवहार (काम) में पूरा होता है; तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है।

यानी आरोहण = कल्पना करना; अवरोहण = उसे करके दिखाना। दोनों के बिना सपना अधूरा है।

3. 'इसका आरोहण मत रोको।' → दोनों में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है।

4. 'नभ तक जाने से मत रोको।' → सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको, उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो।

5. 'स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प।' → रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांत बना सकते हैं। यानी आज़ाद सपनों का लाभ केवल सपना देखने वाले को नहीं, पूरे समाज को मिलता है।

आरोहण है कल्पना करना, अवरोहण है उसे करके दिखाना: दोनों के बिना सपना अधूरा है।

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