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मत बाँधो

शब्दों की बात

कविता के अपने शब्दों के साथ शब्दों के तीन खेल खेलिए।

शब्दों के तीन खेल, कविता के अपने शब्दों से।

1. आरोहण और अवरोहण. ये विपरीतार्थक (उलटे अर्थ वाले) शब्द हैं:

  • आरोहण = नीचे से ऊपर जाना, चढ़ना;
  • अवरोहण = ऊपर से नीचे आना, उतरना।

ये केवल कविता में नहीं आते:

  • भूगोल/खेल: 'पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर आरोहण कर विजय प्राप्त की।' 'नदियाँ विशाल पर्वतों से अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं।'
  • गणित: 'बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखना अवरोहण क्रम कहलाता है।' (छोटी से बड़ी की ओर = आरोही क्रम)

2. समानार्थी शब्द. 'नभ' और 'गगन' एक ही अर्थ देते हैं। इन्हें बदलकर नई पंक्तियाँ बनाइए, और देखिए कि लय बनाए रखने के लिए और क्या बदलना पड़ता है।

शब्द बदलते ही मात्राएँ बदल जाती हैं, और लय टूट सकती है। इसीलिए कवि हर शब्द बहुत सोचकर चुनता है।

3. 'मत' का खेल. कविता में 'मत' के साथ 'बाँधो' और 'काटो' आए हैं। और भी: मत डरो, मत रुको, मत भूलो, मत हारो। ध्यान दीजिए: 'मत' के बाद हमेशा एक आज्ञा आती है।

उलटकर पढ़िए: 'मत' को उलटिए तो बनता है 'तम', यानी अँधेरा! ऐसे और शब्द खोजिए: 'कब' उलटिए तो 'बक' (बगुला)।

'मत' को उलटिए तो 'तम' बनता है: अँधेरा।

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