नए मेहमान
पात्र और रंगमंच-निर्देश
उदयशंकर भट्ट की एकांकी 'नए मेहमान' के पात्रों और रंगमंच-निर्देशों से परिचय कीजिए।
यह कैसा पाठ है? 'नए मेहमान' न कहानी है, न कविता। यह एक एकांकी है: एक ही अंक का नाटक, जिसे मंच पर खेला जा सकता है।
भूमिका. किराये के एक छोटे मकान में लोग गरमी से परेशान हैं और सोने की तैयारी कर रहे हैं। तभी दो ऐसे मेहमान आ जाते हैं जिन्हें घर का कोई नहीं जानता। भूमिका इसे एक कहावत से कहती है: 'मान न मान मैं तेरा मेहमान' (कोई बिना पहचान के मेहमान बनकर बैठ जाए)।
पात्र-परिचय (नाटक में यह सदा दिया जाता है):
- विश्वनाथ: गृहपति (घर के मालिक);
- नन्हेमल, बाबूलाल: अतिथि;
- प्रमोद, किरण: विश्वनाथ के बच्चे;
- आगंतुक: रेवती का भाई;
- रेवती: विश्वनाथ की पत्नी।
स्थान: भारत का कोई बड़ा नगर।
आगंतुक का नाम क्यों नहीं? सूची में केवल 'रेवती का भाई' लिखा है। ऐसा जान-बूझकर किया गया है, ताकि अंत तक पता न चले कि वह कौन है।
रंगमंच-निर्देश. इसके बाद कोष्ठक में एक लंबा अनुच्छेद है। यह बताता है कि मंच पर क्या-क्या होगा:
- समय और ऋतु: गरमी, रात के आठ बजे;
- मंच पर रखा सामान: दो दरवाज़े, किताबों और अखबारों वाली मेज़, दो कुर्सियाँ, एक पलंग;
- पात्रों का रूप और अवस्था: जैसे विश्वनाथ की उम्र 45 वर्ष, गठा हुआ शरीर।
सबसे ज़रूरी वाक्य: "मेज पर रखा हुआ पुराना पंखा चल रहा है, जिससे बहुत कम हवा आ रही है। कमरा बेहद गरम है।"
पलंग पर चार-पाँच साल का एक बच्चा सो रहा है। पंखे की हवा केवल उसी को लग रही है, फिर भी वह पसीने से तर है। विश्वनाथ आते ही हाथ के पंखे से उसे हवा करने लगते हैं।
इन कुछ पंक्तियों में पूरे घर की हालत कह दी गई: एक ही पंखा है, और वह बच्चे के लिए है।
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