आदमी का अनुपात
पाठ से आगे और होंगे कामयाब
कविता को अपने जीवन से जोड़िए और गीत 'होंगे कामयाब' के बारे में जानिए।
'पाठ से आगे' में कविता आपके अपने जीवन तक आती है।
अपनी दीवारें. "अपने जीवन में ऐसी तीन 'दीवारों' के विषय में सोचिए जो आपने स्वयं खड़ी की हैं (जैसे— डर, संकोच आदि)। फिर एक योजना बनाइए कि आप उन्हें कैसे तोड़ेंगे?" प्रश्न दूसरों की नहीं, आपकी अपनी दीवारों का है: डर, संकोच, आलस, किसी विषय से बचना, किसी से बात न करना।
फिर प्रश्न बड़ा होता है: क्या समाज में भी ऐसी दीवारें होती हैं? उन्हें गिराने में हम कैसे मदद कर सकते हैं?
अपने आस-पास 'विराटता' (बड़ा, खुला मन) कैसे लाएँ? पुस्तक का संकेत: किसी को अनदेखा न करना, सबकी सहायता करना। परिवार, विद्यालय या मुहल्ले में।
'करोड़ों में एक ही पृथ्वी'. यह पढ़कर मन में क्या भाव आता है, और इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए आप क्या करेंगे? यह प्रश्न कविता को पर्यावरण से जोड़ देता है: करोड़ों में एक होने का अर्थ है, दूसरी नहीं है।
'होंगे कामयाब'. 'झरोखे से' में इन्हीं कवि का गीत दिया गया है। उसमें आशा है कि:
- "होगी शांति चारों ओर… एक दिन";
- "नहीं डर किसी का आज";
- "हम चलेंगे साथ-साथ / डाल हाथों में हाथ"।
कविता और गीत साथ रखकर पढ़िए. कविता कहती है कि आदमी दीवारें उठाता है और अलग-अलग दुनिया बना लेता है। गीत कहता है कि हम हाथ में हाथ डालकर साथ चलेंगे। दोनों एक ही कवि के हैं: कविता चिंता है, गीत आशा।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.