आदमी का अनुपात
मिलकर करें मिलान
कविता की पंक्तियों को उनके सही अर्थ से मिलाइए।
इस अभ्यास में कविता की छह पंक्तियों को उनके अर्थ से मिलाना है। पहले एक शब्द समझिए: प्रतीक।
प्रतीक वह चीज़ है जो अपने से बड़ी किसी बात का संकेत देती है। जैसे तराज़ू न्याय का प्रतीक है।
मिलान:
- 'दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे' → आदमी के संकुचित (सिमटे हुए) होने का प्रतीक;
- 'परिधि नभ गंगा की' → ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक;
- 'संख्यातीत शंख सी दीवारें' → मनुष्य की खींची कृत्रिम सीमाएँ;
- 'पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक' → पृथ्वी की अल्पता (छोटापन) और अनोखापन;
- 'ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा' → मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ;
- 'एक कमरे में दो दुनिया रचाता' → छोटी जगह में भी अलग हो जाने की आदत।
'कृत्रिम' पर ध्यान दीजिए. कृत्रिम = मनुष्य द्वारा बनाया गया। ये दीवारें प्रकृति ने नहीं बनाईं, मनुष्य ने बनाई हैं।
पृथ्वी दोनों है: छोटी भी, और अनोखी भी: करोड़ों में एक।
'अनुपात' वाला अभ्यास. शब्दों के दो समूह हैं:
- एक ओर: सहअस्तित्व (साथ रहना), सौहार्द (मेल-जोल), विविधता, संतुलन, समावेशिता (सबको शामिल करना), सहनशीलता, शांति;
- दूसरी ओर: वर्चस्व (दबदबा), ईर्ष्या, सत्ता, अहंकार, स्वार्थ, अविश्वास, सीमाबद्धता।
ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए पहला समूह चाहिए: सहअस्तित्व और सौहार्द, समावेशिता और सहनशीलता, संतुलन और शांति। उत्तर के साथ कारण भी लिखिए: यही अभ्यास का असली काम है।
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