सृजनात्मकता और लेखन / Creativity and Writing
लेखन में सृजनात्मक अभिव्यक्ति: साहित्य, मीडिया, अनुवाद
लेखन के तीन रूपों का परिचय देना।
भाषा में सृजनात्मकता के तीन मोटे रूप: साहित्य, मीडिया और अनुवाद।
मीडिया की जड़ मनुष्य की जिज्ञासा है; उसका बुनियादी तत्त्व नयापन — समाचार 'अगले दिन मुरझा जाने वाले फूल' जैसा; यहाँ तथ्यों को बिना घुमाव के सीधे रखना ही सृजनात्मकता है (पाँच शीर्षकों में 'महिला आरक्षण बिल हंगामे में पेश' सबसे स्पष्ट)।
मीडिया का असर बड़ा है — सकारात्मक भी, नकारात्मक भी — इसलिए मीडिया लेखन की ज़िम्मेदारी अधिक है।
अनुवाद: रवींद्रनाथ के 'एकला चलो रे' के हिंदी रूप में 'चल अकेला' की तिहरी आवृत्ति का संगीत बचाने का प्रयास; भारत जैसे बहुभाषी देश में हर व्यक्ति रोज़ थोड़ा-बहुत अनुवादक है।
सृजन अतिरेक से बचाता है — न कोरी बौद्धिकता, न कोरी भावुकता, बल्कि हृदय-बुद्धि संवाद; रचनाकार सभी इंद्रियाँ सजग रखता है — 'जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि'।
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