साहित्यिक लेखन / Literary Writing
भाव, विचार और रचना की रचावट
रचना-प्रक्रिया की शुरुआत समझाना।
मायकोव्स्की बताते हैं कि रचना से पहले वे बिना शब्दों के बुदबुदाते चलते हैं और अपनी चाल को उसी बुदबुदाहट के साथ घटाते-बढ़ाते हैं — यही 'भाव की उमड़न' है।
इस उमड़न में एक लय होती है; लय ही कविता का आधार है, और उसकी गूँज बिखरे शब्दों को क्रम देती है — कौन-सा शब्द रहे, कौन हटे, यह गूँज का 'छनना' तय करता है।
तुकबंदी शुरुआत हो सकती है, पर कविता तब बनती है जब शब्दों में अनुभव शामिल हो; भाव से विचार और विचार से भाव तक आना-जाना रचना को आकार देता है।
सबसे मेहनत का काम है भाव और शब्द के बीच 'प्रवाह' बनाना; इसके लिए बार-बार उसी धुन के पास लौटना पड़ता है जहाँ से रचना शुरू हुई थी।
कहानी कभी किसी दृश्य, कभी संवाद, कभी किसी मनःस्थिति या घटना से शुरू होती है; कहानी का अंत पहले से तय नहीं होता — कथ्य रचना के रास्ते पर ही पकता है।
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