LearnWave
Learn it. Master it.

साहित्यिक लेखन / Literary Writing

लय, खिड़की और रोज़गार की कविता

लय और अवलोकन से कविता लिखवाना।

सूरदास के पद की उन्मत्त लय खुशी से भर देती है, तुलसी का 'हनुमानबाहुक' ओज से; मख्दूम की एक पंक्ति ('आपकी याद आती रही रात भर') पर फ़ैज़ ने भी शानदार कविता लिखी।

पाठ 'चलते चलते' और 'चल चल / घर चल' जैसी टेक से कविता बढ़ाने को कहता है — कविता लिखने का नियम यही है कि कोई नियम नहीं; जैसे कलम (grafting) लगाई जाती है, वैसे ही कविता की कलम लगती है।

खिड़की से देखे-सुने को लिखिए, बीच-बीच में प्रश्न रखिए; एक रेखाचित्र ऐसा खींचिए कि अर्थ के पीछे दूसरा अर्थ झाँके (तीतर की पहेली)। विनोद कुमार शुक्ल: 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' — कविता वही खिड़की है।

केदारनाथ सिंह की 'लिखूँगा' जैसा असर तभी आता है जब कवि विषय को गहराई से जानता हो; यह कौशल धीरे-धीरे अभ्यास से आता है। महादेवी वर्मा ने छह वर्ष से भी कम उम्र में माँ के 'ठाकुर जी' पर तुकबंदी की थी।

कविता रोज़ी-रोटी से भी जुड़ती है: भारतेंदु का 'चने ज़ोर गरम', नज़ीर अकबराबादी की ककड़ी, फेरीवालों की तुकबंदी ('आपका ध्यान किधर है...') और मेट्रो के मज़दूरों के लिए 'पैर में जूता सिर पर टोपी'।

एक टेक, फिर दृश्य बदलते जाइए।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.