संपादन / Editing
संपादन क्या है? शब्द से दोस्ती
संपादन की अवधारणा और शब्द-स्तर का काम समझाना।
रचना टाइप होकर लौटती है तो बदलाव की ज़रूरत लगती है — कुछ अंश छूट जाते हैं या गलत टाइप होते हैं, और लेखक खुद भी शब्द बदलना चाहता है।
'संपादन' पद् धातु से बना है, जिसका अर्थ पूर्ण करना या तैयार करना है (संपत्ति, पदार्थ, संपन्न इसी से); इसलिए संपादन का मतलब रचना के अर्थ और प्रभाव को बढ़ाना है। दो स्तर: शब्द-भाषा का, और कथ्य-प्रस्तुति का।
शब्द का मूल अर्थ 'ध्वनि' है (कान = शब्दग्रह, 'शब्दभेदी बाण')। शब्द रटने की चीज़ नहीं, दोस्त हैं — एक से दोस्ती करो तो वह कई से मिला देता है (दिन से दिनकर, दिनमान, दिनांक)।
शब्दों के अर्थ समय के साथ फैलते हैं: प्रवीण (वीणा), तेल (तिल), कुशल (कुश)। सृजनात्मक लेखन में कोई शब्द दूसरे का पूरा पर्याय नहीं; उपसर्ग अर्थ उलट देते हैं — सुर, लय, ताल से असुर, प्रलय, बेताल।
शब्दक्रम बदलने से लय बदलती है ('जगत है सच्चा...'), और शब्द खेल भी करते हैं: 'परदेसी' और 'परदे सी', फटी आँखें और 'पौ फटना'।
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