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संपादन / Editing

वर्तनी, विराम चिह्न, वाक्य और कोश

भाषा-स्तर का संपादन और संदर्भ-ग्रंथ सिखाना।

व्याकरण संविधान जैसा नियम-ग्रंथ नहीं; वह भाषा की सामान्य प्रवृत्तियों से जन्मता है और लचीला है। रचनाकार व्याकरण से छूट तभी लेता है जब उसे अच्छी तरह जानता हो।

वर्तनी: हिंदी काफ़ी वैज्ञानिक है, पर सीमाएँ हैं ('कि' में मात्रा पहले लिखी पर बाद में बोली जाती है; 'र' चार तरह से)। अंग्रेज़ी के Knife, Calm जैसे शब्दों में उच्चारण बदला, वर्तनी नहीं। छोटा हेरफेर अर्थ बदल देता है: दिन-दीन, कुल-कूल, प्रसाद-प्रासाद।

विराम चिह्नों से पाठक सही उच्चारण और अर्थ तक पहुँचता है ('रुको मत भागो')। पश्चिम में वाक्य के अंत में बिंदु इतालवी पुनर्जागरण तक स्थिर नहीं था; 1566 में एक मुद्रण-संहिता में आज की व्यवस्था सुझाई गई (अशोक वाजपेयी का लेख)।

हर भाषा की अपनी वाक्य-संरचना है; मुहावरे बदल दें तो अनर्थ — 'नाक कट गई' की जगह 'नाक छिल गई' अर्थ खो देता है।

कई शब्दकोश रखें (हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेज़ी); पर गिरिधर, द्रौपदी, अकबर जैसे शब्दों के संदर्भ संदर्भकोश और थिसॉरस बताते हैं, और 'इब्नबतूता' कौन था, यह विश्वकोश।

एक चिह्न, एक मात्रा — पूरा अर्थ।

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