LearnWave
Learn it. Master it.

कैमरा

कविता: कैमरा

कविता 'कैमरा' पढ़ो और छोटू के चाचा के नए कैमरे के बारे में जानो।

अपनी किताब 'वीणा' का पृष्ठ 116 खोलो और पाठ 10 की कविता 'कैमरा' पढ़ो। कविता पृष्ठ 117 तक चलती है। इसे प्रकाश मनु ने लिखा है। कविता में एक बच्चा, छोटू, अपनी बात खुद सुनाता है।

कविता में, छोटू के चाचा एक नया कैमरा लेकर आते हैं। वे घर के अंदर आने से पहले दरवाज़े से ही ज़ोर से पुकारते हैं: छोटू कहाँ गया, जल्दी आओ, यहाँ बैठो, मैं तुम्हारी फोटो खींचूँगा।

छोटू हैरान होकर चाचा से पूछता है — यह क्या चक्कर है? क्या इस कैमरे के अंदर कोई पेंटर (चित्र बनाने वाला) छिपा बैठा है, जो हर किसी का चित्र बिलकुल वैसा ही बना देता है जैसा वह है — मोटा हो या पतला? चाचा हँसकर कहते हैं कि छोटू तो अभी भी भोला-सा बुद्धू ही है! कैमरे में कोई पेंटर नहीं है; यह तो प्रकाश और छाया का खेल है।

फिर कविता कैमरे की खूबियाँ बताती है। जब कागज़ पर चित्र उभर आता है, तो मन कह उठता है — 'क्या ही खूब!', यानी वाह, कितना बढ़िया! फूलों से भरी फुलवारी हो, कोयल, कौआ या गौरैया हो, या घर के लोग — दादी, अम्मा और 'बड़के भैया' (यानी बड़े भाई) — क्लिक करते ही सबका चित्र खिंच आता है।

कविता कहती है कि चीज़ अच्छी हो या बुरी, चित्र बिलकुल वैसा ही आता है। कोई इसे नकली कहे, पर यह असली को भी मात दे देता है। जैसी शक्ल, बिलकुल वैसा (हू-ब-हू) चित्र! आखिर में कविता कहती है — इस कैमरे को अपना मित्र समझो।

कविता में चाचा नया कैमरा लाते हैं और छोटू को फोटो के लिए बुलाते हैं; छोटू पूछता है कि क्या इसमें पेंटर छिपा है, और कविता के आखिर में कैमरे को अपना मित्र समझने को कहा गया है।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.