नीम
गमले में बीज बोना
गमले में बीज बोना सीखो।
कविता 'नीम' पढ़कर क्या तुम्हारा मन भी एक पौधा लगाने का करता है? तुम्हारी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 37 पर 'मेरा पौधा' में बताया गया है कि गमले में बीज कैसे बोते हैं। इसके चरण (कदम) इस क्रम में हैं।
पहला: मिट्टी या टिन का एक खुले मुँह वाला बर्तन लो। कोई छोटा या बड़ा गमला मिल जाए, तो वह भी ले सकते हो। दूसरा: बड़ों की सहायता से बर्तन की तली के बीच में एक छेद करो। किताब बताती है कि यह छेद फालतू (अतिरिक्त) पानी निकलने के लिए है। छेद खुद मत करना — बड़ों की मदद लेना।
तीसरा: टूटे हुए घड़े या सुराही के दो-तीन छोटे-छोटे टुकड़े लो। ये न मिलें, तो छोटे कंकड़-पत्थर ले लो। इन्हें गमले के छेद पर टिका दो। चौथा: गमले के आकार के हिसाब से मिट्टी लो; चाहो तो उसमें खाद मिला सकते हो।
पाँचवाँ: मिट्टी को भुरभुरा करके (हाथ से मसलकर ढीला और बारीक करके) गमले में डालो, और अपनी पसंद के पौधे का बीज बो दो। छठा: थोड़ा-सा पानी छिड़को — बहुत सारा नहीं, थोड़ा-सा।
सातवाँ: हर दिन ध्यान से देखो कि तुम्हारा बोया हुआ बीज कब अंकुरित होता है। अंकुरित होने का अर्थ है बीज में से नन्हा हरा अंकुर (पौधे का पहला छोटा-सा हिस्सा) निकल आना। फिर अपने पौधे को बढ़ते हुए देखने का आनंद लो!
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