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मिठाइयों का सम्मेलन

मिठाइयों के बारे में

कहानी में आई मिठाइयों के बारे में जानो।

आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 9 'मिठाइयों का सम्मेलन' में बहुत-सी मिठाइयाँ सभा में आई थीं: लड्डू, इमरती, पेड़ा, बरफ़ी, रसगुल्ला, जलेबी, रबड़ी, गुलाबजामुन, मैसूरपाक, रसमलाई, सोनपापड़ी, बालूशाही, कलाकंद, गुझिया, काजूकतली और शक्करपारा। इनमें से तुमने कौन-कौन सी खाई है?

हमारे देश के अलग-अलग प्रदेशों की अपनी-अपनी खास मिठाइयाँ होती हैं। किताब के पृष्ठ 109 पर दो उदाहरण हैं: गोवा की मिठाई बेबिंका, और ओडिशा की मिठाई छेना पोड़ा। किताब कहती है कि तुम भी पता करो कि और प्रदेशों में कौन-सी मिठाइयाँ बनती हैं।

मिठाई बनाने में कई तरह की चीज़ें लगती हैं। किताब के पृष्ठ 110 की तालिका में बरफ़ी का उदाहरण है। बरफ़ी में ये चीज़ें लग सकती हैं: अनाज — गेहूँ या चावल; फल-फूल — नारियल या केसर; सूखे मेवे — काजू, बादाम या पिस्ता; दलहन (दालें) — चना या मूँग; तिलहन (जिनसे तेल निकलता है) — तिल; और साग-भाजी — लौकी या कद्दू।

याद रखने का आसान तरीका: 'दलहन' में 'दाल' छिपी है, इसलिए चना और मूँग दलहन हैं। 'तिलहन' में 'तिल' छिपा है, इसलिए तिल तिलहन है। लौकी और कद्दू सब्ज़ियाँ हैं, यानी साग-भाजी।

मिठाइयाँ अलग-अलग प्रदेशों की अपनी होती हैं (गोवा की बेबिंका, ओडिशा का छेना पोड़ा), और उन्हें बनाने में अनाज, फल-फूल, सूखे मेवे, दलहन, तिलहन और साग-भाजी लगते हैं।

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