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तीन मछलियाँ

तीन मछलियों के स्वभाव

कहानी 'तीन मछलियाँ' पढ़ो और तीन अलग स्वभाव वाली मछलियों से मिलो।

यह कहानी आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 10 'तीन मछलियाँ' की है। बहुत पहले उत्तर भारत के एक सुंदर सरोवर में तीन मछलियाँ रहती थीं। तीनों में गाढ़ी मित्रता थी, और वे सरोवर की दूसरी मछलियों के साथ मिल-जुलकर खेलती और घूमती थीं। तीनों के नाम बड़े अनोखे थे, और हर एक का स्वभाव ठीक अपने नाम जैसा था।

पहली मछली का नाम था अनागतविधाता। 'अनागत' का अर्थ है जो अभी आया नहीं, यानी भविष्य। वह बहुत बुद्धिमती थी। आगे चलकर जो समस्याएँ आ सकती थीं, उनका हल वह पहले से ही निकालकर रखती थी।

दूसरी मछली का नाम था प्रत्युत्पन्नमति। इस नाम का अर्थ है ऐसी बुद्धि जो ठीक समय पर तुरंत काम करे। उसकी बुद्धि तीक्ष्ण (तेज़) और तीव्र थी। मुसीबत आने पर वह पल भर में उलझन का हल निकाल लेती थी, इसलिए उसे पहले से तैयारी करना ज़रूरी नहीं लगता था।

तीसरी मछली का नाम था यद्भविष्य, यानी 'जो होना है'। वह आलसी थी। किसी संकट की संभावना पर वह ध्यान नहीं देती थी, और मेहनत (श्रम) और सोच-विचार (चिंतन) से बचती थी। उसका मानना था कि 'जो होना होगा, सो तो होगा ही', इसलिए सब कुछ भाग्य के भरोसे छोड़कर आराम से रहना चाहिए।

तीनों मछलियों का स्वभाव उनके नाम जैसा था: अनागतविधाता बुद्धिमती थी और पहले से हल सोच रखती थी, प्रत्युत्पन्नमति तेज़ बुद्धि वाली थी और समय पर तुरंत हल निकाल लेती थी, और यद्भविष्य आलसी थी और सब भाग्य पर छोड़ देती थी।

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