न्याय
पक्षी क्यों घट रहे हैं
सोचो कि हमारे आस-पास पक्षी क्यों घट रहे हैं।
आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 9 'न्याय' में सिद्धार्थ ने एक घायल हंस को बचाया था। इसी पाठ के पृष्ठ 114 पर पक्षियों के बारे में एक ज़रूरी बात है: कई पक्षियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। गौरैया (घरेलू चिड़िया) को ही लो — शहरों में अब वह पहले से बहुत कम दिखाई देती है।
किताब के चित्रों में कुछ ऐसे कारण दिखाए गए हैं, जिनसे पक्षियों की संख्या घट रही है। पहला: पतंग की डोर (माँझा)। उड़ते पक्षी इस डोर में फँस जाते हैं और उनके पंख कट जाते हैं। दूसरा: पेड़ों की कटाई। चित्र में कटे पेड़ों के ठूँठ और लकड़ियों के लट्ठे पड़े हैं। पेड़ कटने से पक्षियों के घोंसले और रहने की जगह छिन जाती है।
तीसरा: प्रदूषण। चित्र में कारखानों की चिमनियों से काला धुआँ निकल रहा है, गंदा पानी बह रहा है और कूड़े का ढेर लगा है। गंदी हवा, गंदा पानी और कूड़ा पक्षियों को बीमार कर देते हैं। किताब के एक चित्र में मोबाइल टावर के पास उड़ता पक्षी भी दिखाया गया है, और किताब कहती है कि इन सब कारणों पर अपने साथियों से चर्चा करो।
हम पक्षियों की मदद कैसे कर सकते हैं? किताब के पृष्ठ 115 पर एक चित्र में पेड़ के नीचे पानी का बरतन रखा है और चिड़ियाँ पानी पी रही हैं। हम भी गरमी में पक्षियों के लिए पानी रख सकते हैं, पेड़ लगा सकते हैं, कूड़ा इधर-उधर न फेंककर कूड़ेदान में डाल सकते हैं, और पतंग उड़ाने के बाद डोर को इधर-उधर लटकता नहीं छोड़ सकते। ऐसा करके हम भी सिद्धार्थ की तरह पक्षियों को बचा सकते हैं।
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