LearnWave
Learn it. Master it.

तीन मछलियाँ

कहानी की शुरुआत

पढ़ो कि एक दिन तालाब पर क्या हुआ।

आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 10 'तीन मछलियाँ' में आगे यह हुआ। एक दिन शाम के समय दो मछुआरे अचानक उस सरोवर के पास से निकले। उन्होंने यह सरोवर पहले कभी नहीं देखा था। जगह इतनी सुंदर थी कि वे किनारे पर विश्राम (आराम) करने बैठ गए।

तभी उनका ध्यान पानी में तैरती मछलियों पर गया। एक मछुआरा बोला कि देखो, कितनी बड़ी-बड़ी मछलियाँ हैं! दूसरे ने कहा कि इतनी सारी मछलियाँ एक ही जगह उसने पहले कभी नहीं देखीं। फिर पहले मछुआरे ने योजना बनाई — कल सवेरे हम बड़ा जाल लेकर आएँगे और इन सब मछलियों को पकड़ेंगे। दूसरा खुशी से मान गया, और दोनों घर चले गए।

तीनों मछलियों ने मछुआरों की बातें सुन लीं। उन्होंने तुरंत सरोवर की सभी मछलियों को बुलाकर एक सभा की, ताकि अपने प्राण बचाने का कोई उपाय ढूँढ़ा जा सके। अनागतविधाता ने सबको मछुआरों की योजना बताई। यह सुनकर सब मछलियाँ डर गईं।

अनागतविधाता ने उपाय बताया: सवेरा होने से पहले ही हम यह सरोवर छोड़कर पास के दूसरे सरोवर में चले जाएँ। प्रत्युत्पन्नमति ने कहा कि वह यहीं रहेगी, और मछुआरे आए तो उस समय देखकर कोई उपाय ढूँढ़ लेगी। आलसी यद्भविष्य बोली कि वह अपना पुराना घर छोड़कर कहीं नहीं जाएगी — भाग्य में जो लिखा है वही होगा, और हो सकता है मछुआरे आएँ ही नहीं।

फिर अनागतविधाता और बहुत-सी मछलियाँ पास के दूसरे सरोवर में चली गईं। प्रत्युत्पन्नमति, यद्भविष्य और यद्भविष्य की बात मानने वाली कुछ मछलियाँ वहीं रह गईं।

मछुआरों की योजना सुनकर मछलियों ने प्राण बचाने के लिए सभा की; अनागतविधाता पहले ही दूसरे सरोवर में चली गई, जबकि प्रत्युत्पन्नमति समय पर उपाय सोचने के लिए और यद्भविष्य पुराना घर न छोड़ने की ज़िद में वहीं रहीं।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.