न्याय की कुर्सी
विराम चिह्न
कहानी के वाक्यों में विराम चिह्न लगाना सीखो।
तुम्हारी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 16 पर 'भाषा की बात' में कहानी 'न्याय की कुर्सी' की कुछ पंक्तियाँ दो बार दी गई हैं। पहली बार बिना किसी चिह्न के — तब उन्हें पढ़ना और समझना मुश्किल लगता है, क्योंकि पता ही नहीं चलता कि कहाँ रुकें और कौन बोल रहा है। दूसरी बार वही पंक्तियाँ चिह्नों के साथ हैं, और अब उनका अर्थ और भाव तुरंत समझ में आ जाता है।
ऐसे चिह्नों को विराम चिह्न कहते हैं। 'विराम' का अर्थ है रुकना। विराम चिह्न बताते हैं कि लिखे हुए वाक्य में कहाँ ठहरना है और वाक्य का भाव (जैसे अचरज या आदेश) क्या है। किताब में चार चिह्न दिए गए हैं:
पूर्ण विराम (।) — हिंदी में वाक्य पूरा होने पर लगता है; यहाँ पूरा रुकते हैं। अल्प विराम (,) — वाक्य के बीच में थोड़ा-सा रुकने के लिए लगता है। विस्मयादिबोधक चिह्न (!) — अचरज, खुशी, डर या ज़ोर देकर कही गई बात के बाद लगता है। उद्धरण चिह्न (" ") — किसी के ठीक-ठीक बोले हुए शब्दों के शुरू और अंत में लगते हैं।
किताब का उदाहरण देखो। राजा को पता चला कि नया लड़का भी सही न्याय कर रहा है, तो उसने अचरज से कहा: "यह तो और भी आश्चर्य की बात है! हो न हो, पत्थर की इस कुर्सी में ही कोई चमत्कार है। मैं इसकी जाँच करूँगा।" यहाँ '!' राजा का अचरज दिखाता है, 'हो न हो' के बाद ',' पर थोड़ा रुकते हैं, हर वाक्य के अंत में '।' है, और राजा के पूरे बोले हुए शब्द उद्धरण चिह्नों के बीच हैं।
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