LearnWave
Learn it. Master it.

न्याय की कुर्सी

बैठने की चीज़ें

बैठने की अलग-अलग चीज़ों के नाम सीखो।

कहानी 'न्याय की कुर्सी' में राजा ने आज्ञा दी कि सिंहासन को राजदरबार में रख दिया जाए। तुम्हारी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 18 पर बताया गया है कि सिंहासन एक खास तरह की भव्य (बहुत शानदार) कुर्सी होती थी, जिस पर राजा-महाराजा बैठा करते थे।

आज भी हम बैठने के लिए कई तरह की चीज़ों का उपयोग करते हैं। किताब के पृष्ठ 19 पर ऐसी छह चीज़ें दी गई हैं। इनमें से दो का वर्णन किताब में लिखा है: चटाई घास, बाँस या प्लास्टिक से बनी होती है और इसे भूमि पर बिछाकर बैठते हैं। दरी मोटे कपड़े या सूती धागों से बनी होती है और उत्सवों या सामाजिक कार्यक्रमों में बिछाई जाती है।

बाकी चार का वर्णन किताब ने तुम्हारे लिखने के लिए खाली छोड़ा है। उन्हें ऐसे समझो: मूढ़ा सरकंडे या बेंत और रस्सी से बुना एक गोल आसन है, जिस पर एक व्यक्ति बैठता है। चारपाई चार पायों वाली खाट है, जिसका लकड़ी का ढाँचा रस्सी या निवाड़ से बुना होता है — इस पर बैठते भी हैं और सोते भी हैं।

पीढ़ा लकड़ी का एक छोटा और नीचा आसन (पटरा) है, जिस पर ज़मीन के पास बैठते हैं — जैसे रसोई में खाना बनाते या खाते समय। टाट पट्टी टाट (जूट का मोटा, खुरदरा कपड़ा) की एक लंबी पट्टी है, जिसे ज़मीन पर बिछाकर कई लोग एक कतार में बैठते हैं; पहले गाँव के बहुत-से स्कूलों में बच्चे इसी पर बैठते थे।

किताब यह भी पूछती है कि तुम्हारी भाषा में इन चीज़ों को क्या कहते हैं। घर पर बड़ों से पूछकर देखो — हो सकता है तुम्हारे घर में इनके और भी नाम हों!

बैठने के लिए कई पारंपरिक चीज़ें हैं: चटाई (घास, बाँस या प्लास्टिक की, भूमि पर बिछाते हैं), दरी (मोटे कपड़े या सूती धागों की, उत्सवों में), मूढ़ा, चारपाई, पीढ़ा और टाट पट्टी; और सिंहासन राजाओं की भव्य कुर्सी थी।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.