न्याय की कुर्सी
भाषाओं की पहेलियाँ
भारत की भाषाओं से जुड़ी पहेलियाँ बूझो।
तुम्हारी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 20 पर 'बूझो तो जानें' में भारत की अलग-अलग भाषाओं की पाँच पहेलियाँ हैं — गोंड, निमाड़ी, मालवी, बुंदेली और बघेली भाषाओं की। हर पहेली के नीचे कोष्ठक में उसका हिंदी रूप भी दिया है। हो सकता है इनमें से कोई पहेली तुम्हारे घर में भी पूछी जाती हो!
पहेली बूझने का तरीका: हर सुराग को अलग-अलग सोचो, फिर ऐसी चीज़ खोजो जिस पर सारे सुराग एक साथ ठीक बैठें। आओ, पाँचों पहेलियों को समझें।
गोंड पहेली का हिंदी रूप: "न खाती है, न पीती है, संग-संग चलती है।" ऐसी कौन-सी चीज़ है जो कुछ खाती-पीती नहीं, पर धूप में हर समय तुम्हारे साथ चलती है? तुम्हारी छाया! निमाड़ी पहेली: "हरे मटके का लाल पेट, रस पी लो भर-भर पेट।" बाहर से हरा, गोल मटके जैसा, अंदर से लाल और रस से भरा — यह तरबूज है।
मालवी पहेली: "एक जानवर ऐसा, जिसकी दुम पर पैसा।" मोर के लंबे पंखों पर गोल-गोल चमकीली आँख जैसी बूटियाँ होती हैं, जो सिक्कों (पैसों) जैसी लगती हैं — इसलिए उत्तर है मोर। बुंदेली पहेली: "एक लकड़ी की ऐसी कहानी, उसमें छिपा है मीठा पानी।" लकड़ी जैसा सख्त डंडा, पर अंदर मीठा रस — गन्ना।
बघेली पहेली: "एक दीपक से चारों ओर उजियारा।" ऐसा कौन-सा एक दीपक है जिससे सारी दुनिया में उजाला हो जाता है? सूर्य! (वही सूर्य, जिसकी किरन की कविता तुमने पाठ 1 में पढ़ी।)
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