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चाँद का कुरता

चाँद की माँ का विज्ञापन

चाँद की माँ के लिए एक विज्ञापन बनाओ।

कविता 'चाँद का कुरता' में माँ को चाँद के लिए झिंगोला सिलवाना बहुत कठिन लगा। तुम्हारी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 29-30 पर बताया गया है कि इसलिए चाँद की माँ ने एक विज्ञापन निकाला। विज्ञापन वह सूचना है जो बहुत-से लोगों तक कोई बात पहुँचाने के लिए छापी या सुनाई जाती है — जैसे किसी चीज़ की ज़रूरत, बिक्री या नौकरी की सूचना।

विज्ञापन का शीर्षक है: चाँद की माँ की विशेष घोषणा! वह पूछता है — क्या आप सबसे कुशल (होशियार) दर्ज़ी हैं? क्या आप ऐसा कुरता सिल सकते हैं जो रोज़ बदलते आकार में भी ठीक आए? फिर विज्ञापन में अलग-अलग शीर्षकों के नीचे जानकारी दी गई है।

समस्या: मेरा बेटा चाँद कभी एक अंगुल-भर छोटा हो जाता है, तो कभी एक फुट मोटा; उसे ऐसा कुरता चाहिए जो हर दिन उसके शरीर पर ठीक बैठे। आवश्यकता (ज़रूरत): ऐसा कुरता जो अपने-आप छोटा-बड़ा हो सके; ऊन का मोटा झिंगोला, ताकि ठंड से बच सके; और अगर कुरता न बन सके, तो भाड़े (किराए) का भी चलेगा।

पुरस्कार: जो भी दर्ज़ी यह अनोखा कुरता सिलने में सफल होगा, उसे विशेष पुरस्कार मिलेगा। स्थान: चाँद की माँ का घर। संपर्क (बात कैसे करें): आकाशवाणी से संदेश भेजें। और आखिर में लिखा है — जल्दी आवेदन करें, क्योंकि चाँद ठंड से ठिठुर रहा है!

किसी विज्ञापन को पढ़ते समय उसके शीर्षक देखो — समस्या, आवश्यकता, पुरस्कार, स्थान, संपर्क। हर शीर्षक के नीचे उसी से जुड़ी जानकारी होती है, इसलिए जो बात ढूँढ़नी हो, वह जल्दी मिल जाती है।

चाँद की माँ के विज्ञापन में समस्या (चाँद का घटता-बढ़ता आकार), आवश्यकता (अपने-आप छोटा-बड़ा होने वाला कुरता, ऊन का मोटा झिंगोला, नहीं तो भाड़े का भी), पुरस्कार (सफल दर्ज़ी को विशेष पुरस्कार), स्थान (चाँद की माँ का घर) और संपर्क (आकाशवाणी से संदेश) दिए गए हैं।

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